Friday, November 30, 2018

जियोनी के चेयरमैन जुए में हार गए 1000 करोड़ रुपए, कंपनी दिवालिया होने की कगार पर

चीन की स्मार्टफोन कंपनी जियोनी दिवालिया होने की कगार पर पहुंच गई है। जियोनी के चेयरमैन लियु लिरॉन की जुए की लत की वजह से यह नौबत आई है। एंड्रॉयड अथॉरिटी की रिपोर्ट के मुताबिक लिरॉन ने 1008 करोड़ रुपए (14.4 करोड़ डॉलर) की रकम हारने की बात कबूल की है।

लिरॉन का दावा- जुए में कंपनी की रकम नहीं लगाई
चीन की वेबसाइट जेमियां की रिपोर्ट के मुताबिक जियोनी अपने सप्लायर को भुगतान नहीं कर पा रही। इसलिए 20 सप्लायर कंपनियों ने जियोनी को दिवालिया घोषित करने के लिए कोर्ट में अर्जी दाखिल की है।

जियोनी के चेयरमैन लिरॉन का कहना है कि उन्होंने जुए में कंपनी की रकम का इस्तेमाल नहीं किया था। लेकिन, वो कंपनी फंड से उधार ले सकते हैं। 


जियोनी ने अप्रैल में कहा था कि वह भारत में इस साल 650 करोड़ रुपए का निवेश करेगी। क्योंकि, वह यहां टॉप-5 स्मार्टफोन ब्रैंड्स में शामिल होना चाहती है।

कंपनी ने इस साल अप्रैल में जियोनी एफ205 और जियोनी एस11 लाइट फोन लॉन्च करने के साथ भारतीय बाजार में वापसी की थी। ये दोनों मोबाइल सेल्फी के शौकीन लोगों को ध्यान में रखते हुए लॉन्च किए गए थे।

अमेरिका की 125 साल पुरानी रिटेल कंपनी सिआर्स ने सोमवार को न्यूयॉर्क की बैंकरप्सी कोर्ट में दिवालिया प्रक्रिया शुरू करने की अर्जी दाखिल कर दी। आर्थिक संकट से गुजर रही सिआर्स पर 5.6 अरब डॉलर (41440 करोड़ रुपए) का कर्ज है। इसमें से 13.4 करोड़ डॉलर अगले कुछ दिन में चुकाने हैं। कंपनी के कर्जदाता रिस्ट्रक्चरिंग के प्रस्ताव को ठुकरा चुके हैं। सिआर्स को बचाए रखने के लिए सीईओ एडी लेम्पर्ट ने बिजनेस की हिस्सेदारी बेची। उन्होंने कंपनी में अपनी निजी रकम भी लगाई। लेकिन, कामयाब नहीं हुए।

1886 में घड़ी बेचने से सिआर्स की शुरुआत हुई
कंपनी के अभी 700 स्टोर हैं जो लगभग खाली पड़े हैं। कंपनी से भरोसा उठने की वजह से वेंडर ने माल उठा लिया। किसी वक्त सिआर्स अमेरिका की सबसे बड़ी रिटेल कंपनी थी।

साल 1886 में रिचर्ड सिआर्स ने घड़ियां बेचने के लिए सिआर्स वॉच कंपनी शुरु की थी। बाद में कंपनी ने विस्तार किया और यह घरेलू वस्तुओं से लेकर हार्डवेयर तक बेचने लगी। साल 1893 में कंपनी का नाम सिआर्स, रिबक एंड कंपनी हो गया।

साल 1925 में सिआर्स का पहला रिटेल स्टोर खुला। इसके 12 महीने में 7 और स्टोर खोले। उस वक्त सिआर्स अमेरिका की सबसे बड़ी रिटेल कंपनी थी। होम एप्लायंस में इसके केनमोर ब्रांड ने बाजार में अच्छी पकड़ बनाई।

साल 1990 में वॉलमार्ट ने पीछे छोड़ा
रिटेल में सफलता मिलने के बाद सिआर्स ने रिएल एस्टेट में भी हाथ आजमाया। साल 1990 में सिआर्स को पीछे छोड़ वॉलमार्ट अमेरिका की सबसे बड़ी रिटेल कंपनी बन गई।

इन चुनौतियों के बावजूद सीईओ एडी लेम्पर्ट रुके नहीं। साल 2004 में उन्होंने अमेरिका की डिपार्टमेंटल स्टोर चेन के-मार्ट का अधिग्रहण कर लिया। साल 2005 में इसे सिआर्स में मर्ज कर दिया। इस मर्जर के एक साल बाद सिआर्स का मार्केट कैप 20 अरब डॉलर हो गया था।

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